Sunday, September 22, 2013

धरती को मिनटों में दहला कर रख देता है ये हिंदुस्तानी 'तूफान', बिना लड़े हार जाते हैं दुश्मन

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भारत और पाकिस्‍तान के बीच हुई 1965 के युद्ध को 'द्वितीय कश्‍मीर युद्ध' के नाम से भी जाना जाता है। यह जंग संयुक्‍त राष्‍ट्र के दखल के बाद आज ही के दिन यानी 22 सितंबर को खत्‍म हुआ था। 22 सितंबर को संयुक्‍त राष्‍ट्र की सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्‍मति से एक प्रस्‍ताव पारित किया जिसके तहत दोनों देशों को बिना शर्त के युद्धविराम करना था। इस तरह 22 सितंबर को ही यह जंग खत्‍म हो गई। 

इन सबके बीच आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत की सैन्य ताकत सी-17 ग्लोबमास्टर के बारे में। भारत लगातार अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक से लैस सैन्य साजोसामान जुटा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय वायु सेना के बेड़े में सैन्य सामग्री ले जाने वाला एयर क्राफ्ट सी 17 ग्लोबमास्टर III  शामिल हुआ है।  
70 टन वजनी इस एयर क्राफ्ट के आने से भारतीय वायु सेना न सिर्फ ताकत बढ़ेगी बल्कि ज्यादा से ज्यादा सैन्य सामग्री युद्ध स्थल तक ले जाने की क्षमता भी बढ़ेगी। बता दें कि भारत यह एयरक्राफ्ट अमेरिका से खरीद रहा है जिसकी कीमत करीब 20000 करोड़ रुपए है। यह अपने साथ 80 टन वजनी सामग्री ले जा सकता है। 
ये एयरक्रॉफ्ट अमेरिकी ताकत का भी अहम हिस्सा है। आज अमेरिकी सेना में 223वां और आखिरी सी-17 ग्लोबमास्टर शामिल होगा। 
यह वर्तमान रशियन एयरक्राफ्ट il76 की जगह लेगा। चलिए हम आपको इसकी अन्य खूबियों के बारे में बताते हैं।

il 76 एयर क्राफ्ट फिलहाल सेना के बेड़े में मौजूद है। यह करीब 40 टन तक सामग्री अपने साथ ले जा सकता है।सेना में शामिल होने वाला नया एयर क्राफ्ट इस एयर क्राफ्ट से दो गुना ज्यादा सामग्री अपने साथ ले जा सकता है।


भारत ने ग्लोबमास्टर्स के साल 2011 में अमेरिका से सौदा तय किया था जिसमें करीब 10 एयर क्राफ्ट की डिलिवरी की बात थी। जैसे ही 10 एयर क्राफ्ट की डिलिवरी भारत को हो जाएगी उसके बाद 6 और एयर क्राफ्ट खरीदने के लिए भारत कदम बढ़ाएगा।

अंदर से कैसा दिखता है ग्लोब मास्टर्स



कैसा दिखता है ग्लोब मास्टर्स : 


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आगे देखें किस तरह से सैन्य समग्री लेकर जाता है  ग्लोब मास्टर्स



इस तरह से सैन्य समग्री लेकर जाता है  ग्लोब मास्टर्स


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